सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने के लिए राज्यभर में ट्रॉमा प्रशिक्षण और संचालन की बनेगी वृहद योजना: सुबोध उनियाल।

ऋषिकेश:- एम्स ऋषिकेश में शनिवार को वर्ल्ड ट्रॉमा वीक 2026 का समापन हो गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राज्य के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में ट्रॉमा चिकित्सा के माध्यम से लोगों का जीवन बचाने में एम्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एम्स के साथ समन्वय और समझौते के आधार पर राज्यभर में ट्रॉमा चिकित्सा के प्रशिक्षण एवं संचालन के लिए वृहद योजना तैयार करेगी।

शनिवार को संस्थान की ओर से आयोजित सप्ताहव्यापी ट्रॉमा वीक जनजागरूकता अभियान के समापन अवसर पर मुख्य सभागार में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल ने आह्वान किया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों का जीवन बचाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को संवेदनशील होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ ही आपदाओं के लिए भी पहचाना जाता है। इसलिए आपदाओं और आकस्मिक दुर्घटनाओं के दौरान संकट में फंसे प्रत्येक व्यक्ति की जान बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है, जब राज्य के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और चिकित्सा पेशेवरों को ट्रॉमा चिकित्सा का प्रशिक्षण प्राप्त हो। इसके लिए उन्होंने एम्स के साथ मिलकर राज्य में ट्रॉमा चिकित्सा को मजबूत करने की बात कही। उनियाल ने कहा कि आवश्यकता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से हल्द्वानी और देहरादून के अलावा अब कौडियाला, बड़कोट और उत्तरकाशी जैसे चारधाम यात्रा मार्गों पर ट्रॉमा सेंटरों की शुरुआत की गई है। उन्होंने राज्य में रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को स्वीकार करते हुए कहा कि इसे शीघ्र दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं और आपदाओं में गंभीर रूप से घायल लोगों का जीवन बचाने में एम्स का ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर विभाग अहम भूमिका निभा रहा है।

संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने ट्रॉमा टेलीमेडिसिन और एयरो मेडिकल सेवाओं का जिक्र करते हुए तकनीक आधारित इन सेवाओं को आपदाग्रस्त लोगों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं के माध्यम से संस्थान प्रतिदिन कई ट्रॉमा मरीजों का जीवन बचा रहा है। प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि संस्थान विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यभर के लोगों को ऐसे मामलों में सजग रहने और अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा।

इससे पूर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रॉमा सप्ताह के आयोजन सचिव एवं ट्रॉमा सर्जन डॉ. मधुर उनियाल ने संस्थान के ट्रॉमा सेंटर की उपलब्धियों तथा ट्रॉमा वीक की सप्ताहभर की गतिविधियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी हेली एंबुलेंस सेवाओं के माध्यम से एम्स अब तक 354 लोगों का रेस्क्यू कर उपचार कर चुका है। उन्होंने राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा की क्लीनिकल ऑडिट की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे राज्य में ट्रॉमा के मामलों में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने में मदद मिल सकेगी।

कार्यक्रम के दौरान वर्ल्ड ट्रॉमा वीक के आयोजन में अहम भूमिका निभाने वाले विभिन्न विभागों के चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीशियनों के साथ ही परिवहन, पुलिस और वन विभाग के सदस्यों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संस्थान की पूर्व डीन प्रो. जया चतुर्वेदी, राज्य के चिकित्सा शिक्षा निदेशक प्रो. आशुतोष सयाना तथा ट्रॉमा वीक आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत धमीजा, विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, सीएनओ अनीता रानी कंसल, एम्स ट्रॉमा सर्जन डॉ. भास्कर, डॉ. मान सिंह, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. रूबी कटारिया, एसएनओ अखिलेश उनियाल, शशिकांत, हेम्स टीम के सदस्य, वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति, माधव सेवा सदन तथा अन्य संगठनों के सदस्य मौजूद रहे।

राज्य सरकार और एम्स ऋषिकेश के बीच हुआ एमओयू:- कार्यक्रम के दौरान एम्स ऋषिकेश और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बीच ट्रॉमा प्रशिक्षण, ट्रॉमा चिकित्सा और इस क्षेत्र में वृहद कार्ययोजना तैयार करने को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। बताया गया कि इस समझौते के तहत राज्य सरकार और एम्स ऋषिकेश मिलकर काम करेंगे, जिससे भविष्य में आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायल होने वाले लोगों का जीवन बचाने में मदद मिलेगी।

एमओयू पर संस्थान की ओर से कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह और ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कमर आजम तथा राज्य सरकार की ओर से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और चिकित्सा शिक्षा निदेशक प्रो. आशुतोष सयाना ने हस्ताक्षर किए।

प्रो. आशुतोष सयाना ने बताया कि ट्रॉमा चिकित्सा प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजकीय मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों के साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को भी शामिल किया जाएगा।

 

By Janswar

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