(अरुणाभ रतूड़ी जनस्वर)

गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने समाज में विकृति के खिलाफ अपनी रचनाओं के माध्यम से आवाज उठाई।

मुनि की रेती:- गढ़ रत्न लोकगीत मर्मज्ञ नरेंद्र सिंह नेगी ने उत्तराखण्ड राज्य के लोगो को गाली देने वाले पर गाना गाकर सरकार की चूले हिलाने की कवायद शुरू कर फि है जो भारी पड़ती दिख रही है।उनके माध्यम से समाज मे आई विकृति के खिलाफ सदैव अपनी रचना के माध्यम से खिलाफत की गई है।जिनमे नो छम्मी नारायण…कमीशन कु माछ भात.. कथगा खेल्यु रे ने धूम मचाकर सरकार बदलने का कार्य किया है।यही नही इस प्रसिद्द लोकगीत कलाकार ने पहाड़ की संस्कृति, सभ्यता और वेशभूषा ओर अन्य समकालीन विषयो पर अपनी सशक्त लेखनी ओर शब्दों के माध्यम से लोक सँस्कृति को अग्रणीय स्थान प्राप्त किया है।

इस बार की होली विशेष रही है कोई पहाड़ी गानों में थिरकने को लालायित रहा, परमार्थ में विदेश से आये 50 देशों के योगसाधको ने जबरदस्त होली खेलकर लुफ्त उठाया लेकिन वही गढ़वाल गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने अलग अंदाज में मत मारो प्रेम लाला पिचकारी, जिसमे भरी है भारी गाली… को सार्वजनिक कर पहाड़ के लोगो की भावनाओ को नया मंच प्रदान कर सरकार के लिये मुसीबत पैदा कर दी है।पहाड़ का स्वाभिमान की रक्षा करना पहाड़वासियों का मूल मन्त्र रहा है और फिर उनके ही प्रदेश में उनको गाली कैसे बर्दाश्त होगी और देने वाला कोई और नही प्रदेश का मन्त्री ओर जनता से जिसको विधायक बनाया उसी ने ये कारनामा कर दिखाया जिसका भारी विरोध हो रहा है ऐसे में श्री नेगी का ये गीत की गूंज दूर दूर तक सुनाई देगी और सरकार के लिए ये परेशानी खड़ा कर भूचाल ला सकती है।इस गाने के आने के बाद हर पहाड़वासियों की जंवा में ये शब्द तेज़ी से दौड़ रहे है और शोशियल मीडिया में ये धमाल मचा रहा है।लगता है सरकार अपनी फजीहत से बचने के लिये मन्त्री को बाहर का रास्ता दिखाकर भाजपा पर आए संकट से अपना पल्ला झाड़ने का कार्य करेगी वरना ये गीत लम्बे समय तक सरकार की बची छवि को धूमिल करने का कार्य कर बेदखल भी कर सकने का मादा रखती है।

By Janswar

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