17 न्यायिक अधिकारियों के मामलों से अलग होने का दावा, उत्तराखंड में ACR व्यवस्था को लेकर सरकार के आदेश को चुनौती।

देहरादून:- भारतीय वन सेवा (IFS) के 2002 बैच के वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामले एक बार फिर चर्चा में हैं। AIIMS में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के पद पर रहते हुए उनके द्वारा भ्रष्टाचार से जुड़े 200 से अधिक मामलों में कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी। भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के दौरान उनके कई तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

17 न्यायिक अधिकारियों के अलग होने का दावा:-चतुर्वेदी से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई से अब तक 17 न्यायिक अधिकारियों के स्वयं को अलग करने का दावा किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इनमें सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश, नैनीताल हाई कोर्ट के चार न्यायाधीश, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के नौ न्यायिक सदस्य और जिला न्यायपालिका के दो न्यायाधीश शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, प्रत्येक मामले में न्यायिक अधिकारी के सुनवाई से अलग होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी मामलों को किसी एक समान कारण से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

ACR व्यवस्था को लेकर उत्तराखंड सरकार के आदेश को चुनौती:- संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के आदेश को चुनौती दी है। यह आदेश उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट यानी ACR के मूल्यांकन और अनुमोदन की व्यवस्था से संबंधित है।

मामले में यह तर्क दिया गया है कि यदि प्रमुख वन संरक्षक (PCCF) रिपोर्टिंग अधिकारी हैं, तो स्वीकृति देने वाला अधिकारी PCCF से उच्च रैंक का होना चाहिए। याचिका में वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसके तहत प्रमुख सचिव वन को स्वीकृतकर्ता अधिकारी बनाया गया है।

कई न्यायिक अधिकारियों ने सुनवाई से खुद को अलग किया:- उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अलग-अलग समय पर कई न्यायिक अधिकारियों ने चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग किया है। इनमें सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश रंजन गोगोई और यू.यू. ललित, उत्तराखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, राकेश थपलियाल, आलोक वर्मा और रविंद्र मैठाणी सहित अन्य न्यायिक अधिकारी शामिल बताए गए हैं।

इसके अलावा CAT की कुछ पीठों और जिला न्यायपालिका से जुड़े न्यायिक अधिकारियों के भी मामलों से अलग होने का उल्लेख किया गया है।

न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं मामले:- संजीव चतुर्वेदी से जुड़े विभिन्न मामले और उत्तराखंड में IFS अधिकारियों की ACR व्यवस्था से संबंधित विवाद न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। मामलों में संबंधित पक्षों की दलीलों और अदालतों के आदेशों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

By Janswar

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