देहरादून:-  अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने जिलाधिकारी, देहरादून के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन प्रेषित कर सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्त दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति निरस्त करने तथा अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी प्रकरण की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच कराने की मांग की।

मंच का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। दोषियों को सजा मिलने के बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका और इस पूरे प्रकरण से जुड़े अनुत्तरित सवालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसी संदर्भ में मंच ने राष्ट्रपति महोदया से निम्नलिखित मांगें की हैं।

1. दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद से बर्खास्तगी

सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्त दुष्यंत कुमार गौतम को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाए, ताकि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

2. दुष्यंत कुमार गौतम और अजेय कुमार की जांच

दोनों को सीबीआई जांच के दायरे में लाकर इस प्रकरण में उनकी संभावित भूमिका की जांच की जाए। आवश्यकता के अनुसार उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन और व्हाट्सऐप चैट सहित संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाए।

3. वनंतरा रिजॉर्ट के कमरे को ध्वस्त किए जाने के मामले की जांच

अंकिता भंडारी जिस कमरे में रहती थीं, उसे बुलडोजर से ध्वस्त किए जाने तथा इससे संभावित साक्ष्यों को हुए नुकसान की निष्पक्ष जांच की जाए। इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, यमकेश्वर की विधायक रेणु बिष्ट तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच के दायरे में समीक्षा की जाए।

4. पुलकित आर्य के डिजिटल साक्ष्यों की जांच

मंच ने सवाल उठाया कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे पुलकित आर्य के मोबाइल फोन से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की जांच किस सीमा तक की गई। मंच की मांग है कि उपलब्ध तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उसके फोन का डेटा रिकवर करने की संभावनाओं की जांच की जाए तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाए, ताकि कथित वीआईपी बताए जा रहे व्यक्तियों के साथ संभावित संपर्कों और इस अपराध से संबंधित किसी भी भूमिका का पता लगाया जा सके।

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच का स्पष्ट मत है कि अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय दिलाने के लिए केवल दोषियों की सजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस मामले से जुड़े प्रत्येक अनुत्तरित प्रश्न का निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित समाधान भी आवश्यक है।

मंच ने राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया है कि इन मांगों पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए संबंधित प्राधिकारियों को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ताकि अंकिता भंडारी को न्याय मिल सके और जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हो।

प्रदेशभर में आज विभिन्न संगठनों की ओर से उपजिलाधिकारी एवं जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन देकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग की गई।

ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से कमला पंत, मोहित डिमरी, इंद्रेश मैखुरी, सुजाता पॉल, निर्मला बिष्ट, विमला कोली, प्रभात डंडरियाल, त्रिलोचन भट्ट, उर्मिला शर्मा, सुरेश कुमार, राजू सिंह आदि मौजूद थे।

By Janswar

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