देहरादून:-  उत्तराखंड पुलिस ने अपनी पहचान में बदलाव करते हुए नया ध्येय वाक्य ‘कर्म सत्यं शौर्यम्’ अपनाया है। इसके साथ ही 26 साल बाद उत्तराखंड पुलिस के लोगो को भी नया स्वरूप दिया गया है। नए लोगो में शौर्य के प्रतीक लॉरेल रीथ (तेज पत्तों की माला) के बीच हिमालय और नदी को स्थान दिया गया है। इसके साथ ही रंगों के संयोजन में भी बदलाव किया गया है।

उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड पुलिस की विशिष्ट पहचान को और मजबूत करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए ध्येय वाक्य और लोगो के माध्यम से पुलिस के कर्म, सत्य और शौर्य के मूल्यों को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है।

नए लोगो में हिमालय और नदी को मिली जगह:-  उत्तराखंड की भौगोलिक पहचान को दर्शाने के लिए नए लोगो में हिमालय और नदी को शामिल किया गया है। इसके साथ ही पुलिस की वर्दी और अन्य प्रतीकों के डिजाइन व रंगों में भी बदलाव किया गया है। नए डिजाइन में गहरे नीले रंग के स्थान पर आसमानी रंग को शामिल किया गया है।

‘मित्र पुलिस’ के बाद अब नई पहचान:- उत्तराखंड पुलिस लंबे समय से ‘मित्र पुलिस’ की छवि के साथ काम कर रही है। अब नए ध्येय वाक्य और लोगो के जरिए पुलिस की पहचान को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य पुलिस के कर्तव्य, सत्यनिष्ठा, साहस और जनता के प्रति समर्पण की भावना को प्रदर्शित करना है।

लोगो में लॉरेल रीथ क्यों? लॉरेल रीथ को शौर्य, विजय और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन यूनानी और रोमन संस्कृति में इसका उपयोग विजेताओं और विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वालों के सम्मान के लिए किया जाता था। उत्तराखंड पुलिस के लोगो में इसे शामिल करने का उद्देश्य पुलिस के गौरवशाली इतिहास, साहस और समाज के प्रति सेवा व समर्पण को दर्शाना है।

राष्ट्रपति पुलिस कलर से जुड़ा बदलाव:- उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान किए जाने की प्रक्रिया के बीच नए लोगो और ध्येय वाक्य को लेकर बदलाव किए गए हैं। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित की गई थी। समिति ने नए लोगो के साथ पुलिस कलर, बेल्ट और आर्म बैज सहित अन्य प्रतीकों के डिजाइन को भी अंतिम रूप दिया।

देहरादून स्थित पुलिस लाइन के स्टेडियम के बाहर भी नए लोगो को प्रदर्शित किया गया है। इसे पुलिस की वर्दी, थानों, कार्यालयों और आधिकारिक दस्तावेजों पर इस्तेमाल करने की योजना है।

 

By Janswar

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