योग को बताया अनुशासन और रिकवरी का आधार, युवाओं और अभिभावकों से खेल को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील।

मुनि की रेती:- मुनि की रेती में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के दौरान भारतीय महिला ऑलराउंड क्रिकेटर स्नेहा राणा ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने अपने जीवन, क्रिकेट करियर और योग से जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए पूछे गए सवालों के जवाब बेबाकी से दिए। कार्यक्रम में निगम के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन ने उनका साक्षात्कार लिया।

स्नेहा राणा ने अपने शुरुआती सफर के बारे में बताया कि उन्होंने बचपन में गली-मोहल्लों में क्रिकेट खेलना शुरू किया। उनके खेल के प्रति रुचि को देखते हुए परिवार ने उन्हें देहरादून क्रिकेट अकादमी में प्रशिक्षण दिलाया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और कड़ी मेहनत को दिया।

योग के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि योग जीवन में अनुशासन लाता है। वर्ष 2016 में लगी चोट के कारण उन्हें एक वर्ष तक क्रिकेट से दूर रहना पड़ा, लेकिन योग और प्राणायाम ने उनकी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि आज भी वे नियमित रूप से मेडिटेशन और सूर्य नमस्कार करती हैं।

परिवार के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनके अभिभावकों ने हमेशा उनका साथ दिया, जिसके कारण वे आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऑलराउंड खिलाड़ी बन पाईं।

खेल को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने उत्तराखंड के अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर दें और खेल को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं।

फील्ड में अपने स्वभाव पर उन्होंने कहा कि वे शांत रहकर खेलना पसंद करती हैं, लेकिन टीम की जीत के लिए संघर्षशील और आक्रामक रवैया भी जरूरी होता है।

उन्होंने बताया कि खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और वापसी करने में उन्हें पांच वर्ष का समय लगा। उन्होंने कहा कि मेहनत और अनुशासन ही सफलता की कुंजी है। भारतीय टीम के साथ विश्व कप जीतना उनके जीवन का सबसे गर्व का क्षण रहा।

टीम भावना पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एकता ही सफलता की सबसे बड़ी ताकत है और ड्रेसिंग रूम का माहौल हमेशा सकारात्मक रखा जाता है ताकि खिलाड़ी मानसिक तनाव से दूर रहें।

मानसिक संतुलन पर उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी को हमेशा अपने खेल के प्रति समर्पित रहना चाहिए और निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए।

अंत में उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि उत्तराखंड के लोग मेहनती और साहसी होते हैं, यदि वे लक्ष्य निर्धारित कर लें तो उसे जरूर हासिल कर सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में निगम के एमडी द्वारा स्नेहा राणा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

By Janswar

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