जिलाधिकारी ने कहा कि लिंगानुपात में असंतुलन से समाज में अनेक सामाजिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसे दूर करने और कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार ने पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू किया है। इस अधिनियम के तहत भ्रूण के लिंग का पता लगाने के लिए प्रसवपूर्व लिंग परीक्षण और लिंग चयन से संबंधित गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और संबंधित केंद्रों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने विद्यार्थियों से बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।
मताधिकार का प्रयोग प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य: डीएम:- लोकतंत्र में मतदान के महत्व पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक वोट लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मतदान के माध्यम से नागरिक अपने पसंदीदा जनप्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और देश के विकास की दिशा तय करने में योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक सशक्त और समावेशी बनाने में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
जिलाधिकारी ने विश्वविद्यालय के उन विद्यार्थियों को भी मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया, जिन्होंने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है। उन्होंने बताया कि पात्र नागरिक अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से संपर्क कर अथवा भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से प्रारूप-6 भरकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों को आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का अनिवार्य रूप से प्रयोग करने तथा अन्य लोगों को भी मतदान के लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई। उन्होंने विद्यार्थियों से लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदार नागरिकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
