विश्व आईवीएफ दिवस: अब बांझपन कोई समस्या नहीं, आईवीएफ तकनीक से संभव है इलाज।
एम्स ऋषिकेश:- बांझपन के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इसके कारण और रोकथाम के उद्देश्य से शनिवार को एम्स में विश्व आईवीएफ दिवस मनाया गया। इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में इलाज की आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब बांझपन समस्या नहीं रहा और आईवीएफ तकनीक के माध्यम से इसका इलाज संभव है।
बांझपन के इलाज, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक और माता-पिता बनने के सफर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित विश्व आईवीएफ दिवस में समाज में बांझपन के प्रति भ्रांतियों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी गयीं। एम्स में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में बांझपन को दूर करने हेतु आईवीएफ एक उन्नत तकनीक है और इसके परिणाम भी बहुत अच्छे हैं। उन्होंने निःसंतान दंपतियों के लिए इस सुविधा को लाभकारी बताया और कहा कि वैज्ञानिक क्रांति के चलते आईवीएफ तकनीक से संतान उत्पत्ति के बारे में उन दंपत्तियों को विशेष उम्मीद जगी है जो प्राकृतिक रूप से माता-पिता नहीं बन पाते हैं।
स्त्री एंव प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष प्रो. जया चतुर्वेदी ने बताया कि 25 जुलाई 1978 को इंग्लैंड में दुनिया की पहली आईवीएफ बच्ची लुईस जॉय ब्राउन का जन्म हुआ था। जबकि भारत में 3 अक्टूबर 1978 को पहली टेस्ट ट्यूब बेबी ने इस तकनीक से जन्म लिया था। कनुप्रिया अग्रवाल नाम की इस बच्ची को दुर्गा का नाम दिया गया। तब से यह दिन विश्व आईवीएफ दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों के मन से बांझपन से जुड़े डर और गलतफहमियों (मिथकों) को दूर करना की इस दिवस को मनाए जाने का उद्देश्य है। आईवीएफ केन्द्र की फेकल्टी डाॅ. लतिका चावला ने बांझपन, इसके आधुनिक उपचार और उपयोग की जाने वाली विभिन्न विधियों के बारे में विस्तार पूवर्क प्रकाश डाला। कार्यक्रम में एम्स स्थित आईवीएफ केन्द्र में इलाज उपरांत जन्में कुछ शिशुओं के माता-पिता को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को डीन रिसर्च शैलेन्द्र कुमार हांडू ने भी संबोधित किया। बताया कि आईवीएफ सिर्फ गर्भधारण का मौका ही नहीं देता, बल्कि यह उम्मीद, संतान के विकल्प और गंभीर बांझपन का सामना कर रहे दंपतियों को जैविक माता-पिता बनने में भी मदद करता है। इस अवसर पर डीडीए ले. कर्नल गोपाल मेहरा, डाॅ. वाई.एस. पयाल, डाॅ. विकास पंवार, डाॅ. मधुर उनियाल सहित गायनी विभाग की डाॅ. कविता खोइवाल, डाॅ. राजलक्ष्मी मुंद्रा, डाॅ. ओमकुमारी, डॉ पूनम गिल, सीएनओ डाॅ. अनिता रानी कंसल सहित नर्सिंग अधिकारी और अन्य विभागीय स्टाफ मौजूद रहा।
आईवीएफ से एम्स में जन्में 9 बच्चे:- ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में आईवीएफ सुविधा उपलब्ध है। कई निःसंतान दंपति अभी तक इस तकनीक के माध्यम से संतान प्राप्त कर चुके हैं। डाॅ. लतिका चावला ने बताया कि केन्द्र में इलाज करवाने के उपरांत अभी तक 15 आईवीएफ गर्भधारण और 9 स्वस्थ शिशु जन्म ले चुके हैं। जबकि आ.ई.यू और ओवुलेशन के माध्यम से जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या 50 हो चुकी है। उन्होंने बताया कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए इच्छुक महिला एम्स की गायनी विभाग की ओपीडी के माध्यम से अपना पंजीकरण करवा सकती है। बताया कि बुद्धवार के दिन अपरान्ह 2 बजे से आईवीएफ की विशेष ओपीडी संचालित होती है।
