पहाड़ों में रोजगार का नया सहारा बना बकरी पालन, ‘गोट वैली योजना’ से सशक्त हो रहे ग्रामीण। WWW.JANSWAR.COM

फैक्ट्रियों के बिना भी पहाड़ों में रोजगार! 30 हजार का लोन और मुफ्त बकरियों से बदल रही ग्रामीणों की जिंदगी।

देहरादून:- पहाड़ी क्षेत्रों में भारी-भरकम फैक्ट्रियों और बड़ी कंपनियों के बिना भी रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं और इसका बेहतरीन ज़रिया बनकर उभरा है बकरी पालन. उत्तराखंड सरकार की ‘गोट वैली योजना’ के तहत ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 30 हजार तक का आसान लोन, मुफ्त मवेशी और अन्य सहायता दी जाती है. एक प्राकृतिक वैली के रूप में देहरादून जिला इस पहल का प्रमुख केंद्र बना है जहाँ खासकर चकराता के दूरदराज क्षेत्रों के किसान बड़ी संख्या में इस योजना से जुड़कर लाभ उठा रहे हैं. चकराता के ठंडे और पहाड़ी अनुकूल वातावरण में बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है और युवाओं को पलायन रोकने के लिए एक टिकाऊ स्वरोजगार का विकल्प थमा रहा है

वीओ 1- उत्तराखंड के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि साल 2022-23 में पहाड़ी इलाकों में रोजगार से किसानों और युवाओं को जोड़ने के लिए गोट वैली योजना’ शुरू की गई थी. उन्होंने बताया नवंबर 2023 में से लांच किया गया था. इसका लक्ष्य पलायन को रोककर पहाड़ों पर रोजगार उत्पन्न करना था. उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में पशुपालन, कृषि और डेयरी संचालन ही रोजगार के साधन होते हैं. उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग ऐसे लोगों की मदद करता है जो लोग पशुपालन करना चाहते हैं. बकरी पालन के लिए विभाग लाभार्थी को 30 हजार का लोन करवा कर देता है जो पांच बकरियों के लिए होता है, इसके बाद विभाग की तरफ से 10 बकरी और एक बकरा मुफ्त में उसे दे दिया जाता है. कुल मिलाकर उनकी 16 बकरी- बकरे की यूनिट बन जाती है जिससे उन्हें आमदनी हो सके. पशुपालन मंत्री ने बताया अभी तक राज्य के लगभग साढ़े पांच हजार लोगों को इसका लाभ मिल चुका है.

वीओ 2- पशुपालन मंत्री सौरभ बहू उन्होंने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जो आईटीबीपी से जुड़कर काम कर रहा है.आईटीबीपी सीधे तौर पर उत्पादों को हमारे राज्य के किसानों से खरीदते हैं. उन्होंने बताया एक समय ऐसा था उत्तरकाशी जिले के पशुपालक हिमाचल प्रदेश में अपनी भेड़ -बकरियां बेचते थे और 6- 8 महीने तक उनका पेमेंट नहीं मिल पाता था लेकिन आईटीबीपी के साथ काम करने के बाद 48 घंटे के अंदर आईटीबीपी की टीम आती है, विभक्ति और से डॉक्टर भी जाते हैं ताकि पशुओं की जांच हो सके कि वह स्वस्थ है या नहीं. इसके बाद भेड़, बकरी और मछलियां आईटीबीपी के जाती है. उन्होंने कहा कि किसानों के खाते में 48 घंटे के भीतर ही उनके पास पैसा आ जाता है. ऐसे में बिचौलिए आदि का काम पूरी तरह से खत्म हो गया है. उन्होंने बताया कि लोगों में काफी बकरी पालन के प्रति रुचि देखने के लिए मिल रही है. उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को इन योजनाओं की जानकारी दी जाती है और कई बार खुद पशुपालन मंत्री पशुपालकों के साथ मुलाकात करके उनकी परेशानियों और नई पॉलिसीयों के बारे में जानकारी भी देते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इनका लाभ उठा सके. इसके लिए इच्छुक किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए ‘अपुनि सरकार’ पोर्टल ([https://eservices.uk.gov.in/](https://eservices.uk.gov.in/)) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.