ऋषिकेश, 9 अक्टूबर 2026: उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में आयोजित टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल चिकित्सा और दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए समय पर जांच, सही उपचार, पोषण, जनजागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि टीबी के विरुद्ध लड़ाई में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक मरीज को समय पर सही उपचार मिल सके।

उन्होंने कहा कि टीबी केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। यह बीमारी मरीज के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार, आजीविका और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करती है। इसलिए टीबी से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान, निक्षय पोषण योजना, निक्षय मित्र पहल और टीबी मुक्त पंचायत जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी ही टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति है।

दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तकनीक महत्वपूर्ण

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्य में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, लंबी दूरियों और मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच प्रभावित होती है। ऐसे में आधुनिक तकनीक इन बाधाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने एम्स ऋषिकेश द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में टीबी की दवाएं पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग को एक प्रेरक पहल बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के समन्वय से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाया जा सकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता का आकलन केवल जांचों की संख्या या मशीनों की उपलब्धता से नहीं किया जाना चाहिए। इसका वास्तविक आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि मरीज की पहचान कितनी जल्दी हुई और उसका उपचार कितनी शीघ्रता से शुरू किया गया।

टीबी से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता जरूरी

राज्यपाल ने टीबी उन्मूलन में आशा कार्यकर्ताओं, अन्य स्वास्थ्य कर्मियों, निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।

उन्होंने टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक, भेदभाव और भ्रांतियों को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि टीबी से पीड़ित व्यक्तियों को दूरी और भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और सहयोग की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब उनसे लोगों का जीवन सुरक्षित और बेहतर बने।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श ठोस कार्ययोजनाओं और प्रभावी नीतियों में परिवर्तित होगा। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान कर सकता है और यहां विकसित प्रभावी स्वास्थ्य मॉडल देश के अन्य पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह, पॉलिसी रेजीलेंस फाउंडेशन के निदेशक नंदीश आर. पैठानी, आयोजन अध्यक्ष डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. गिरीश सिंधवानी सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

 

 

By Janswar

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