बांधों से पानी छोड़ने से पहले देनी होगी सूचना, अब प्रभाव का भी होगा पूर्व आकलन।

देहरादून, 8 जुलाई। उत्तराखंड में मानसून के दौरान बाढ़ और आपदा जोखिम को कम करने के लिए राज्य सरकार ने बांधों और बैराजों की निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी प्रमुख बांधों और बैराजों को प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 8 बजे जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो और डिस्चार्ज की रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) को भेजना अनिवार्य किया गया है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि यदि किसी भी बांध या बैराज से पानी छोड़ा जाना हो तो इसकी पूर्व सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिला प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि पानी किन क्षेत्रों तक कब पहुंचेगा, नदी के जलस्तर में कितनी वृद्धि होगी और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर उसका संभावित प्रभाव क्या होगा, ताकि समय रहते लोगों को सतर्क कर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

बैठक में सभी परियोजनाओं को नदी जलस्तर सेंसर और डिस्चार्ज मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त आंकड़े एपीआई के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम का विस्तार करने पर भी जोर दिया गया। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को अपने क्षेत्र में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 25 करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में अधिकारियों ने अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम बांधों के बीच बेहतर समन्वय, चेतावनी उपकरणों की नियमित टेस्टिंग तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में मशीनरी और संसाधनों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए, ताकि भारी बारिश के दौरान किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

By Janswar

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