मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना एवं अनुष्ठान संपन्न कराए। कपाट बंद होने के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और उन्होंने भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
तीन पड़ावों से होकर शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचेगी उत्सव डोली:- कपाट बंद होने के उपरांत भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली का प्रथम रात्रि प्रवास आज चोपता में होगा। 07 नवंबर को डोली भनकुण्ड पहुंचेगी, जबकि 08 नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल श्री मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ में विराजमान होगी। इसके बाद शीतकाल में भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना मक्कूमठ में ही संपन्न होगी।
पंचकेदारों में तृतीय केदार हैं भगवान तुंगनाथ:- भगवान तुंगनाथ धाम पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजनीय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र धाम विश्व के सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिरों में प्रसिद्ध है। देश-विदेश से श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
06 नवंबर को कपाट बंद होने का विशेष संयोग:- भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि का विशेष संयोग भी रहा है। वर्ष 2019 में भी 06 नवंबर को कपाट शीतकाल के लिए बंद हुए थे। वर्ष 2025 में भी कपाट बंद होने की तिथि 06 नवंबर ही थी। इस वर्ष भी इसी तिथि को कपाट बंद होने से यह संयोग एक बार फिर बना है।
इस अवसर पर मंदिर के पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी, अन्य पुजारीगण, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऊखीमठ मनोज नेगी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, क्षेत्रीय नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
