- दहेज की मांग को लेकर विवाहिता के साथ जघन्य अपराध पर महिला आयोग सख्त, अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, एसएसपी देहरादून को दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश।
- 11 तारीख को आयोग कार्यालय में पीड़िता से मुलाकात करेंगी अध्यक्ष; बेहतर उपचार और काउंसलिंग की जाएगी सुनिश्चित।
देहरादून:- देहरादून के थाना सेलाकुई के अंतर्गत भाऊवाला (सैनिक कॉलोनी) क्षेत्र में एक विवाहिता को बंधक बनाकर रखने, खाना न देने और उसके साथ अमानवीय व रूह कँपा देने वाली शारीरिक व मानसिक क्रूरता करने का एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता का विवाह अप्रैल 2024 में हुआ था, जिसके बाद उसे पिछले 10 महीनों (जुलाई 2025 से मई 2026) तक कमरे और शौचालय में बंद करके रखा गया। इस दर्दनाक घटना के संबंध में पीड़िता के पिता द्वारा उत्तराखंड राज्य महिला आयोग कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए पूरी आपबीती साझा की गई है। शिकायत मिलने पर आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने तत्काल मामले का संज्ञान लेते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है। वर्तमान में पीड़िता अपने माता-पिता के साथ अपने घर पर है।
पीड़िता के पिता द्वारा महिला आयोग कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए जानकारी दी गई कि उनकी बेटी को पिछले 10 महीनों से घर के कमरे और बाथरूम में बंद रखा जाता था और सामान्य भोजन भी नहीं दिया जाता था। प्रताड़ना की पराकाष्ठा पार करते हुए उसकी सास द्वारा उसे अपनी पेशाब तक पीने के लिए मजबूर किया गया और उसके गुप्त अंगों पर लकड़ी से मारकर गंभीर शारीरिक व मानसिक पीड़ा दी गई। साथ ही, दहेज की मांग को लेकर ₹5 लाख रुपये देने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। साथ ही हमारी बेटी को उसके दो जुड़वा बच्चों से भी मिलने नहीं दिया जा रहा था। उसके ऊपर जबरदस्ती तीसरा बच्चा करने का भी दबाव बनाया जा रहा था।
पिता ने शिकायत में बताया कि जब वे अपनी बेटी से मिलने ससुराल गए, तो उन्हें बेटी से मिलने तक नहीं दिया गया और उनके साथ लगातार झूठ बोला गया। इसके बाद, उन्होंने स्थानीय बीडीसी मेंबर और ग्राम पंचायत के सदस्यों से संपर्क किया। बीडीसी मेंबर और पंचायत सदस्यों के कड़े सहयोग व निगरानी द्वारा ही वे अपनी बेटी को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाल कर अपने साथ ला पाए। जब पीड़िता को वहां से निकाला गया, तब क्रूरता के कारण उसकी मानसिक स्थिति इतनी खराब थी कि वह दिन, तारीख और साल तक भूल चुकी थी।
इस घिनौने कृत्य पर आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट किया है कि आगामी 11 तारीख को आयोग कार्यालय में वह स्वयं पीड़िता से मुलाकात करेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग द्वारा पीड़िता को इस मानसिक आघात से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग की जाएगी और बेहतर से बेहतर उपचार व चिकित्सीय व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी, ताकि वह जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ हो सके।
इससे पूर्व सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से इस गंभीर मामले की जानकारी मिलने पर अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने तत्काल थाना प्रभारी (एसएचओ) सेलाकुई से फोन पर वार्ता कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली थी। वार्ता के दौरान एसएचओ द्वारा मामले की सही प्रकार से जानकारी न देने और इतने संवेदनशील प्रकरण को बेहद हल्की धाराओं में दर्ज करने पर अध्यक्ष ने पुलिस के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और शिथिलता पर भारी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब पीड़िता के साथ पिछले 10 महीनों से अमानवीय अत्याचार हो रहा था, उसे अपमानित कर चरम प्रताड़ना दी गई और उसके गुप्त अंगों पर प्रहार किए गए, तब पुलिस ने इसे अत्यंत हल्के में लिया और मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
इस लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेते हुए आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून प्रमेन्द्र डोभाल से सीधे फोन पर वार्ता की और मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषी ससुराल पक्ष (पति, सास व ससुर) के विरुद्ध कठोरतम धाराओं में कड़ाई से कानूनी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने एसएसपी से बात करते हुए साफ तौर पर कहा कि इस पूरे प्रकरण पर अत्यंत गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़िता को पूरी तरह से न्याय मिलना चाहिए। अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश दिए कि आरोपियों के विरुद्ध कोई भी साक्ष्य छूटना नहीं चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे जघन्य अपराध के आरोपियों को हर हाल में कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए।
अध्यक्ष ने आगे कहा कि आज माननीय प्रधानमंत्री जी के गौरवशाली नेतृत्व में देश की महिलाएं हर क्षेत्र में विकास की नयी गाथा गढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर देवभूमि में दहेज की मांग को लेकर महिलाओं के साथ ऐसी घिनौनी, अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट और तीखे शब्दों में कहा कि ऐसी घटिया व विक्षिप्त मानसिकता के लोगों के विरुद्ध समाज और कानून में कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए और इस प्रकार के क्रूर अपराधियों को समाज के बीच खुलेआम रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस मामले में सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आयोग इस मामले की स्वयं निरंतर मॉनिटरिंग कर रहा है और पीड़िता को हर हाल में त्वरित न्याय व पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाएगी।
