भारी बारिश के बावजूद उत्तराखंड की महिलाओं और आंदोलनकारियों ने किया सीबीआई कार्यालय की तालाबंदी, अंकिता भंडारी मामले में उठाए तीखे सवाल।
देहरादून :- वीरांगना अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आज देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय, सीमा द्वार (निकट आईटीबीपी) में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आंदोलनकारी पहुंचे। भारी बारिश के बावजूद महिलाओं, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सैलाब न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरा।
पुलिस प्रशासन द्वारा सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर भारी बैरिकेडिंग कर महिलाओं और आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद आंदोलनकारी महिलाओं ने दूसरे प्रवेश द्वार तक पहुंचकर वहां भी प्रतीकात्मक तालाबंदी कर दी।
इस दौरान सीबीआई अधिकारी बाहर आए, लेकिन वे कार्यालय परिसर के अंदर ही मौजूद रहे और वहीं से आंदोलनकारियों के साथ वार्ता हुई। आंदोलनकारियों ने सीबीआई अधिकारियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल रखे और जांच की वर्तमान स्थिति पर जवाब मांगा। अधिकारियों के जवाबों से असंतुष्ट आंदोलनकारियों ने सीबीआई कार्यालय के मुख्य द्वार पर भी ताला जड़ दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच द्वारा घोषित सीबीआई कार्यालय तालाबंदी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी हुई, जनगीत गाए गए और आंदोलनकारियों ने कहा कि अंकिता न्याय यात्रा के दौरान जो संकल्प लिया गया था, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।
आंदोलनकारियों द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल: 1. आखिर अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP कौन है?
2. दुष्यंत गौतम और अजय कुमार जैसे नाम सामने आने के बावजूद उनसे पूछताछ क्यों नहीं हुई?
3. मुख्यमंत्री के आदेशों पर बुलडोजर कार्रवाई कर साक्ष्य मिटाने के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
4. बुलडोजर चलाकर संभावित साक्ष्य मिटाने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
5. छह महीने बाद भी सीबीआई जांच में क्या प्रगति हुई?
6. क्या सीबीआई ने अब तक उर्मिला सनावर, रेनू बिष्ट एवं अन्य लोगों से पूछताछ की है?
7. अंकिता भंडारी के माता-पिता को अब तक सीबीआई ने क्यों नहीं बुलाया?
प्रदर्शन के दौरान “CBI जवाब दो”, “अंकिता भंडारी को न्याय दो”, “VIP को गिरफ्तार करो”, “दुष्यंत गौतम से पूछताछ कब करोगे?”, “अजय कुमार से पूछताछ करो” और “साक्ष्य मिटाने वालों को गिरफ्तार करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।
भारी बरसात के बीच मौजूद लोगों ने धैर्यपूर्वक वक्ताओं की बातें सुनीं। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन केवल अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, लोकतांत्रिक जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की लड़ाई है।
कार्यक्रम में कमला पंत, सुजाता पॉल, निर्मला बिष्ट, त्रिलोचन भट्ट, मोहित डिमरी, एडवोकेट अलमास सिद्दीकी, शंकर गोपाल, ललित उत्तराखंडी (उत्तराखंड टाइगर फोर्स), मनीष सुंदरियाल, विनोद कुमार धस्माना (उत्तराखंड समानता पार्टी) सहित कई सामाजिक एवं जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। त्रिलोचन भट्ट और सतीश धौलखंडी ने मौजूद लोगों के साथ जनगीत भी गाए। इस अवसर पर विमला कोहली, पदमा गुप्ता, ईश्वर शर्मा, शकुन्तला मुंडेपी, किरण पुरोहित, मातेश्वरी रजवार,मंजू बलौदी, भुवनेश्वरी कठैत, शांता नेगी, शांति सेमवाल, मंजू सेमवाल, पार्वती बिष्ट, यशोदा नेगी, चंदा, सीमा नेगी, रूप खत्री, सुशीला राणा, अंजू जुयाल, पूर्णिमा बलूनी, स्वाति नेगी, संजीव घिल्डियाल, समदर्शी बर्त्वाल, वीके डोभाल, मुकेश सेमवाल, कमलेश खंतवाल, वीरेंद्र असवाल, नत्था सिंह पवार, बलबीर सिंह, सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता पिछले लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन मिले हैं। जनता अब सच जानना चाहती है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगी।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता भंडारी के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा और न्याय के लिए है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
जारीकर्ता:- अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच
